दिल्ली आबकारी नीति मामला: केजरीवाल-सिसोदिया समेत सभी आरोपियों को कोर्ट ने बरी किया

दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े सीबीआई के एक मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 27 फरवरी को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी कहा कि आबकारी नीति में कोई आपराधिक साजिश या भ्रष्टाचार साबित नहीं हो पाया। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और इसे लेकर कांग्रेस ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है।
कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना: इच्छाधारी नाग की उपमा
कांग्रेस मीडिया सेल के चेयरमैन पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि भाजपा कोई राजनीतिक दल नहीं है बल्कि यह रूप बदलने वाला इच्छाधारी नाग है, जो किसी भी हद तक गिर सकता है। उनके अनुसार, बीजेपी का एकमात्र लक्ष्य कांग्रेस को हराना और देश को कांग्रेस मुक्त बनाना है। पवन खेड़ा ने यह भी कहा कि भाजपा ने पिछले 12 वर्षों में टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ लगातार जहर उगला, लेकिन अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पार्टी की प्रशंसा कर रहे हैं।

BJP की रणनीति पर कांग्रेस का आरोप
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि BJP का यह सम्मान केवल चुनावी फायदे और कांग्रेस पर घटिया प्रहार करने के उद्देश्य से है। उनका कहना था कि गुजरात और पंजाब चुनावों को ध्यान में रखते हुए, आम आदमी पार्टी और अन्य सहयोगियों के खिलाफ कार्यवाही चुपचाप तेज होगी। कांग्रेस के अनुसार, एजेंसियों का चुनाव प्रचार के औजार के रूप में इस्तेमाल करना और प्रतिशोध को शासन का हथियार बनाना बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि चुनाव से पहले विपक्ष पर मामले अचानक तेज होंगे, ताकि राजनीतिक दबाव बनाया जा सके।
राजनीतिक गलियारों में हलचल और आगे की राजनीति
केजरीवाल और सिसोदिया को बरी किए जाने के फैसले के बाद दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक लड़ाई फिर से तेज हो गई है। विपक्ष ने इस फैसले को बीजेपी पर दबाव बनाने और चुनावों के दौरान विरोधियों को परेशान करने की रणनीति बताया है। वहीं बीजेपी ने अभी तक इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आगामी गुजरात और पंजाब चुनावों में यह मामला विपक्षी दलों की रणनीति और चुनावी चर्चाओं में अहम भूमिका निभा सकता है। इस फैसले ने राजनीतिक तनाव और चुनावी सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।
