Delhi Airport: हज़ारों यात्रियों की परेशानियों का राज खुला! IGI एयरपोर्ट पर सॉफ्टवेयर खराबी ने उड़ानों को रोका

Delhi Airport: नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहल ने संसद में कई सांसदों के सवाल का जवाब देते हुए कहा कि 6 नवंबर को हवाई यातायात सेवा संदेशों के प्रसंस्करण और डिलीवरी में गंभीर विलंब देखा गया। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्वीकार किया कि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) संचालन में सॉफ्टवेयर संबंधित तकनीकी समस्या के कारण दो दिनों तक सैकड़ों उड़ानों में देरी हुई। इस घटना ने फ्लाइट संचालन को प्रभावित किया और हवाई यातायात प्रबंधन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
तकनीकी समस्या और प्रभावित सिस्टम
मंत्रालय ने बताया कि इस आउटेज से एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट ऑटोमेशन सिस्टम (ATMAS) प्रभावित हुआ। इसके कारण महत्वपूर्ण एयरोनॉटिकल फिक्स्ड टेलीकम्युनिकेशन नेटवर्क (AFTN) संदेशों में देरी हुई, जिनमें फ्लाइट प्लान, जरूरी फ्लाइट इंफॉर्मेशन सेंटर (FIC) नंबर और एयर डिफेंस क्लीयरेंस शामिल हैं। हालांकि घटना के समय लगभग 800 उड़ानों में देरी की सूचना मिली थी, लेकिन मंत्री मुरलीधर मोहल ने स्पष्ट किया कि 6 नवंबर से 8 नवंबर के बीच केवल 397 निर्धारित यात्री उड़ानों में देरी हुई। इस घटना ने हवाई यातायात संचालन में मौजूदा तकनीकी प्रणाली की कमजोरी को उजागर किया।

भविष्य में सुधार के लिए आदेशित अपग्रेड
केंद्र ने यह भी जानकारी दी कि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने मौजूदा IP-आधारित ऑटोमैटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (AMSS) को बदलकर नया एयर ट्रैफिक सर्विसेज़ मैसेज हैंडलिंग सिस्टम (AMHS) लगाने का काम शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य हवाई यातायात संचालन की विश्वसनीयता बढ़ाना और ऐसी तकनीकी समस्याओं को दोबारा होने से रोकना है। मंत्रालय का कहना है कि यह अपग्रेड हवाई अड्डे के ATC नेटवर्क में सुधार लाएगा और उड़ानों की समय पर संचालन सुनिश्चित करेगा।
एयरलाइंस को हुए वित्तीय नुकसान
वहीं, एयरलाइंस पर हुए वित्तीय नुकसान के संबंध में मंत्री मुरलीधर मोहल ने कहा कि मौसम, भीड़भाड़ या तकनीकी खराबी के कारण ऑपरेशनल बाधाओं के दौरान एयरलाइंस को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ती है। इसलिए किसी एक कारक के कारण हुए नुकसान का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि हवाई यातायात संचालन में सुधार और नई तकनीक के इस्तेमाल से भविष्य में ऐसे नुकसान को कम करने की कोशिश की जाएगी। यह पहल न केवल यात्रियों के लिए सुरक्षित और समयबद्ध उड़ान सुनिश्चित करेगी, बल्कि एयरलाइंस की वित्तीय स्थिरता में भी मददगार साबित होगी।
