
Assam: देश के पांच राज्यों में इस साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं और असम इनमें सबसे ज्यादा चर्चा में है। वजह है मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के लगातार विवादित बयान। चुनाव नजदीक आते ही असम का राजनीतिक माहौल गरमाता जा रहा है। मुख्यमंत्री के बयान केवल राजनीति तक सीमित नहीं रहे बल्कि समाज के ताने बाने को भी झकझोर रहे हैं। बीते दिनों दिए गए उनके बयान ने पूरे देश का ध्यान असम की ओर खींच लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी माहौल में ऐसे बयान मतदाताओं को ध्रुवीकृत करने की कोशिश हो सकते हैं। वहीं आम लोग चिंता जता रहे हैं कि चुनावी फायदे के लिए सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
मिया मुस्लिम बयान और विवाद
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मिया मुसलमानों को लेकर जो टिप्पणी की उसने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने खुले तौर पर कहा कि वे मिया मुसलमानों के खिलाफ हैं और उन्हें असम से बाहर निकालने के लिए हर संभव कदम उठाने को तैयार हैं। उनके इस बयान को विपक्ष ने नफरत फैलाने वाला करार दिया। असम में मिया शब्द का इस्तेमाल अक्सर बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है जिन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी बताया जाता है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि राज्य में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक मौजूद हैं और यही असम की समस्याओं की जड़ हैं। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे बिना डर के इन्हें परेशान करें ताकि ये राज्य छोड़ने पर मजबूर हो जाएं।
कांग्रेस पर हमला और चेतावनी
अपने बयान के दौरान मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पार्टी पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वर्षों तक इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया और इसी का नतीजा है कि आज असम इस स्थिति में पहुंच गया है। उनका कहना था कि अगर पहले सख्त कदम उठाए गए होते तो हालात इतने खराब नहीं होते। हिमंत बिस्वा सरमा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस समुदाय को नहीं रोका गया तो ये पूरे असम में फैल जाएंगे। उन्होंने इसे राज्य की पहचान और संसाधनों के लिए खतरा बताया। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई और कई सामाजिक संगठनों ने भी चिंता जाहिर की।
विपक्ष का विरोध और बीजेपी की सफाई
मुख्यमंत्री के बयान पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि ऐसे बयान समाज को बांटने वाले हैं और इससे असम में सामाजिक शांति भंग हो सकती है। कांग्रेस नेता उदित राज ने चेतावनी दी कि इस तरह की राजनीति देश के लिए खतरनाक साबित हो सकती है और इसके गंभीर परिणाम होंगे। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। वहीं बीजेपी ने अपने मुख्यमंत्री का बचाव किया। पार्टी का कहना है कि हिमंत बिस्वा सरमा का बयान किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं बल्कि अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ था। बीजेपी ने जोर देकर कहा कि पार्टी केवल कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की बात कर रही है। इसके बावजूद चुनावी असम में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।
