PM मोदी की अगुवाई में सेवा तीर्थ में कैबिनेट की पहली बैठक का ऐतिहासिक फैसला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में मंगलवार, 24 फरवरी 2026 को पीएम के नए ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। इस बैठक में कुल 12,236 करोड़ रुपये की 8 बड़ी परियोजनाओं और योजनाओं को मंजूरी दी गई। बैठक में सबसे अहम फैसला केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने का रहा। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि लंबे समय से राज्य में इसके नाम परिवर्तन की मांग की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह कदम राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को मान्यता देने के लिए लिया गया है।
केरल का नाम अब होगा केरलम
कैबिनेट ने राज्य के नाम बदलने के प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। अब राष्ट्रपति बिल को राज्य विधानसभा के पास भेजेंगे। राज्य विधानसभा के पास से बिल पारित होने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा। मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की भूमिका इसमें अहम होगी। इस फैसले से राज्य की पहचान और सांस्कृतिक धरोहर को मजबूती मिलेगी। लंबे समय से यह मांग राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठती रही है और अब इसे आधिकारिक मंजूरी मिल गई है।

बड़े बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं पर कैबिनेट की मंजूरी
कैबिनेट ने रेलवे परियोजनाओं पर भी बड़े फैसले लिए हैं। गोंदिया (महाराष्ट्र)–जबलपुर (मध्यप्रदेश) रेलवे लाइन के दोहरीकरण के लिए 5,236 करोड़ रुपये, पुनारख–किऊल तीसरी और चौथी लाइन के लिए 2,668 करोड़ रुपये और गम्हरिया–चांदिल तीसरी और चौथी लाइन के लिए 1,168 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इसके अलावा श्रीनगर में 1,067 करोड़ रुपये की लागत से नया इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल बनाया जाएगा। अहमदाबाद मेट्रो फेज 2B का विस्तार भी 1,067 करोड़ रुपये की मंजूरी के साथ होगा। इसके अलावा कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर 430 करोड़ रुपये खर्च होंगे और पावर सेक्टर सुधार पर भी नीति बनाई गई।
अश्विनी वैष्णव ने बताया भविष्य का दृष्टिकोण
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सेवा तीर्थ सत्ता का प्रतीक नहीं बल्कि देश के हर व्यक्ति को सशक्त बनाने का केंद्र है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पिछले दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला और आयुष्मान योजना से स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की। GST में सुधार और डिजिटल टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि आज के फैसले आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित करेंगे और भारत को 2047 तक विकसित और दुनिया की तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे।
