‘Bad Girl’ की कहानी ने तोड़ा आदर्श नायिका का पर्दा, विरोध के बीच मिली लोकप्रियता

फिल्मों में नायिका की छवि हमेशा से एक आदर्श और पारंपरिक रूप में प्रस्तुत की जाती रही है। दर्शकों ने लंबे समय तक महिलाओं के किरदारों में स्नेह, प्रेम और कोमलता ही देखी है। लेकिन 2025 में रिलीज हुई फिल्म ‘Bad Girl’ ने इस परंपरा को चुनौती दी और एक ऐसी नायिका को दिखाया जो अपनी इच्छाओं और कल्पनाओं को खुलकर जीती है। इस फिल्म की नायिका की कहानी ने कई लोगों को चौंका दिया। यह नायिका लड़कों की गर्दन पर टपकते पसीने को देखकर उत्तेजित हो जाती है और अपनी यौन कल्पनाओं को दबाने के बजाय उन्हें पूरा करने का फैसला करती है। इस साहसिक विषय ने फिल्म के खिलाफ भारी विरोध भी उत्पन्न किया, लेकिन OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज के बाद इसे दर्शकों का भरपूर प्यार मिला।
कहानी: राम्या की जिज्ञासा और जज्बात
फिल्म की कहानी राम्या नाम की लड़की के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका रोल अंजली शिवरामन ने निभाया है। राम्या तमिल ब्राह्मण परिवार में जन्मी है, जहां उसकी मां एक शिक्षिका हैं। इस पारंपरिक परिवार में राम्या पर दबाव होता है कि वह एक परंपरागत लड़की बने। लेकिन राम्या बचपन से ही अपनी यौन इच्छाओं को दबाने की बजाय उन्हें महसूस करती और समझती है। स्कूल के दिनों में वह कक्षा के दौरान लड़कों की गर्दन पर टपकते पसीने को देखकर उत्तेजित हो जाती है और अपनी कल्पनाओं को जीने का सपना देखती है। फिल्म का मकसद नायिकाओं की परंपरागत छवि को तोड़ना है और यह दिखाना है कि लड़कियां भी लड़कों की तरह इच्छाओं और कल्पनाओं से भरी होती हैं जिन्हें वे दबाना नहीं चाहतीं।
विवाद और विरोध की भंवर
फिल्म ‘Bad Girl’ का निर्देशन और कहानी लेखन वर्शा भरत ने किया है। फिल्म की सबसे बड़ी चर्चा यह थी कि नायिका एक ब्राह्मण तमिल परिवार की लड़की है और फिल्म का विषय वयस्क है। इस वजह से फिल्म के खिलाफ खूब विरोध प्रदर्शन हुए। जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई तो बॉक्स ऑफिस पर इसकी कमर टूट गई। कई लोगों ने इसे समाज के लिए अनुचित बताया और विरोध जताया। इसके बावजूद, फिल्म OTT प्लेटफॉर्म्स पर काफी लोकप्रिय हुई और सोशल मीडिया पर इसके पक्ष में सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं।
OTT प्लेटफॉर्म पर मिली लोकप्रियता
जहां सिनेमाघरों में ‘बैड गर्ल’ को ज्यादा सफलता नहीं मिली, वहीं Hotstar जैसे OTT प्लेटफॉर्म पर यह फिल्म दर्शकों के बीच खूब चर्चा में आई। ऑनलाइन दर्शकों ने इसे साहसिक और नए विचारों से भरपूर बताया। इस फिल्म ने कई युवाओं और महिलाओं को अपने भीतर छुपी इच्छाओं और फैंटसीज को स्वीकारने का हौसला दिया। ‘बैड गर्ल’ ने साबित कर दिया कि भारतीय समाज में बदलाव की जरूरत है और महिलाएं भी अपने जज्बातों को खुलकर व्यक्त करना चाहती हैं। यह फिल्म महिलाओं की आजादी और उनकी इच्छाओं की आवाज़ बनकर उभरी है।
