देश

असम कांग्रेस में बड़ा विवाद: कंदर्प कालिता ने गौरव गोगोई पर लगाए गंभीर आरोप

असम के पूर्व कांग्रेस नेता कंदर्प कालिता ने पार्टी से इस्तीफा देने के बाद राज्य अध्यक्ष गौरव गोगोई पर तीखी टिप्पणियाँ की हैं। कालिता ने आरोप लगाया कि गोगोई पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ “नौकरों” जैसा व्यवहार करते हैं और असमियत के प्रति उनमें कोई राष्ट्रीय भावना नहीं है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि गोगोई वरिष्ठ नेताओं और जमीनी कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं करते और उनका रवैया पार्टी में गहरी नाराजगी पैदा कर रहा है।

गोगोई पर असमियत और वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ आरोप

कंदर्प कालिता ने यह भी दावा किया कि गौ्रव गोगोई असम की क्षेत्रीय पहचान और हितों के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने कहा कि गोगोई केवल न्याय के नाम पर खोखले वादे कर रहे हैं और असम के लिए उनका कोई वास्तविक राष्ट्रभक्ति भाव नहीं है। कालिता ने गायक जुबिन गर्ग के मामले का जिक्र करते हुए कहा कि गोगोई झूठे वादे कर जनता को भ्रमित कर रहे हैं। “गोगोई जुबिन गर्ग के लिए न्याय दिलाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन यह सब केवल दिखावा है और लोगों को गुमराह करने के लिए किया जा रहा है।”

असम कांग्रेस में बड़ा विवाद: कंदर्प कालिता ने गौरव गोगोई पर लगाए गंभीर आरोप

‘लौरा राजा’ और पार्टी के अंदरुनी राजनीति

पूर्व नेता ने गौरव गोगोई को ‘लौरा राजा’ बताते हुए कहा कि वह पार्टी में अधिकार और विशेष दर्जा का आभास लेकर व्यवहार करते हैं। कालिता ने यह भी आरोप लगाया कि असम कांग्रेस वर्तमान में वरिष्ठ नेता रकिबुल हुसैन के प्रभाव में काम कर रही है। उन्होंने कहा, “असम में कांग्रेस अब ‘कांग्रेस (R)’ जैसी बन गई है, जहां रकिबुल हुसैन का शासन चलता है।” उनके इस्तीफे और टिप्पणियाँ इस समय आई हैं जब पार्टी अगले विधानसभा चुनावों से पहले संगठन को मजबूत करने और क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस का मौन और राजनीतिक विश्लेषण

कंदर्प कालिता के आरोपों पर अब तक कांग्रेस नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन टिप्पणियों से राज्य इकाई में चल रही आंतरिक असहमति और संघर्ष की झलक मिलती है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता अब इस विवाद के बाद भविष्य में नेतृत्व और चुनाव रणनीति को लेकर विचार कर रहे हैं। असम में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद पार्टी की स्थिरता और कार्यकर्ता मनोबल पर भी असर डाल सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button