
तेलंगाना में आज से चिकन कारोबार पूरी तरह प्रभावित हो गया है। राज्यभर में करीब 50,000 चिकन की दुकानें बंद रखने का फैसला लिया गया है। यह हड़ताल चिकन शॉप ओनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर की जा रही है, जो पोल्ट्री कंपनियों द्वारा लाभ मार्जिन घटाए जाने के विरोध में है।
दुकानदारों का कहना है कि पिछले दो दशकों से उन्हें प्रति किलोग्राम चिकन पर लगभग 26 रुपये का मार्जिन मिल रहा था, जिसे हाल ही में घटाकर 16 रुपये कर दिया गया है। इस अचानक कटौती से छोटे व्यापारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और उनका कारोबार घाटे में जाने लगा है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष नेल्लुतला शेखर के मुताबिक, बढ़ती महंगाई के बीच दुकान चलाना पहले ही मुश्किल हो चुका है। बिजली बिल, किराया और कर्मचारियों की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में 16 रुपये प्रति किलो का मार्जिन उनके लिए पर्याप्त नहीं है। दुकानदारों की मांग है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 30 रुपये प्रति किलो किया जाए, ताकि वे अपना व्यवसाय टिकाऊ बना सकें।
इस हड़ताल का असर बाजार में साफ दिखाई दे सकता है। बड़ी संख्या में दुकानों के बंद रहने से चिकन की सप्लाई प्रभावित होगी, जिससे कीमतों में उछाल आने की आशंका है। हालांकि, कॉर्पोरेट आउटलेट्स खुले रह सकते हैं, लेकिन वे पूरे बाजार की मांग को पूरा नहीं कर पाएंगे।
स्थिति को देखते हुए एसोसिएशन ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बड़े पोल्ट्री कंपनियों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के बीच संतुलन बनाने के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह हड़ताल लंबे समय तक चल सकती है।
फिलहाल, उपभोक्ताओं को चिकन की कमी और बढ़ती कीमतों का सामना करना पड़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार और कंपनियां इस विवाद को कैसे सुलझाती हैं और बाजार कब सामान्य स्थिति में लौटता है।
